पीएम मोदी 20 नवंबर को करेंगे मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन का शिलान्यास, नेपाल तक पहुंचना होगा आसान

बाबुल दीप, मुजफ्फरपुर। बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन परियोजना अहम साबित होने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर को इस परियोजना का शिलान्यास कर सकते हैं। इस तारीख को उनका बिहार दौरा प्रस्तावित है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। करीब 80 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण से भारत-नेपाल सीमा तक आवागमन सुगम होने के साथ उत्तर बिहार के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी

एनएचएआई के परियोजना निदेशक विनीत कुमार बागेरिया ने इस परियोजना के संबंध में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को जानकारी दी है। मुजफ्फरपुर-सोनबरसा राष्ट्रीय राजमार्ग-22, जिसे पहले एनएच-77 कहा जाता था, के चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाना है।

एनएचएआई ने पहले भी भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन कुछ त्रुटियों के कारण जिला भू-अर्जन कार्यालय ने उसे वापस कर दिया था। कार्यालय के मापक की जांच में कुछ बिंदुओं पर आपत्ति सामने आई थी। अब इन कमियों को दूर कर बुधवार को संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजा गया है।

एनएचएआई ने भूमि अधिग्रहण के लिए थ्री-डी अधिघोषणा जारी करने का अनुरोध किया है। परियोजना निदेशक ने शिलान्यास से पहले इस प्रक्रिया को पूरा करने की जरूरत बताई है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार से परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और फिलहाल निविदा प्रक्रिया चल रही है।

रकबा शून्य होने पर उठी थी आपत्ति

भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव में औराई अंचल के शाहपुर मौजा के पांच खेसरों को शामिल किया गया था। इनमें खेसरा संख्या पांच और छह का रकबा पहले ही राजपत्र में प्रकाशित हो चुका है। इस वजह से वर्तमान प्रस्ताव में इन हिस्सों का अर्जित रकबा शून्य यानी 0.000 दर्ज किया गया है।

नक्शे के अनुसार, अधिग्रहण के दायरे में आने वाले खेसरों की मापी और पहले प्रकाशित राजपत्र में दर्ज रकबे का मिलान करने के बाद यह स्थिति सामने आई। संशोधित प्रस्ताव में संबंधित खेसरों के सामने अर्जित रकबा 0.000 दिखाया गया है।

इसी तरह मकसूदपुर, मलिकपुर और विष्णुपुर राजे मौजों में भी भूमि अधिग्रहण से जुड़े तकनीकी पहलुओं का समाधान किया गया है। पहले एनएचएआई की ओर से अधिग्रहित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) के लिए निर्धारित एलाइनमेंट बाईं ओर था, जबकि वर्तमान में एनएचएआई की सड़क बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की बनाई सड़क पर चल रही है। पुल निर्माण निगम की सड़क के दाईं ओर एनएचएआई की ओर से पहले भूमि अधिग्रहण नहीं किया गया था। इसी कारण कुछ खेसरों के मामले में पहले राजपत्र में दर्ज रकबे को घटाया नहीं गया है।

तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक होंगे खर्च

मुजफ्फरपुर-सोनबरसा फोरलेन परियोजना की लंबाई करीब 80 किलोमीटर होगी। फिलहाल यह मार्ग दो लेन का है। इसे चौड़ा करने और फोरलेन बनाने पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य उत्तर बिहार के सड़क ढांचे को मजबूत करना और भारत-नेपाल सीमा तक आवागमन को आसान बनाना है। सड़क के निर्माण से यात्रियों और मालवाहक वाहनों को बेहतर संपर्क सुविधा मिलने की उम्मीद है।

सात बड़े पुल, तीन रेलवे ओवरब्रिज और छह अंडरपास बनेंगे

परियोजना के तहत सात बड़े पुल बनाने का प्रस्ताव है। इनमें बागमती नदी पर बनने वाला 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है। इसके अलावा तीन रेलवे ओवरब्रिज, दो फ्लाईओवर और छह अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है।

इस सड़क परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है और भारत-नेपाल सीमा तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

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